प्रकृति

कहीं दूर इक आशियाँ हम भी बना लेते हैं
रन्ज ओ गम जिंदगी के यही छोड़ देते हैं।।
ठंडी हवाओं में जहाँ तन मन बहकता हो
प्रकृति के स्पर्श से जीवन महकता हो।।
सूखे रेगिस्तान जहां की हरियाली को तरसे
दिलों की जमीं पे प्रकृति का प्यार सदा बरसे।।
शांत अलौकिक वातावरण मदमस्त छटायें बिखेरे हैं
घने वृक्षों की शाखाओं को असंख्य लतायें घेरे हैं।।
पल दो पल में मौसम ने विह्गल ये मन कर डाला
विभिन्न वर्णी फूलों ने मेरा जीवन उपवन कर डाला।। #नीलम_रावत

So close of nature

#Lovenature #love_wild #love_forest

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