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| (फोटो साभार :हरदेव नेगी ,रुद्रप्रयाग जिले का सुंदर सा गाँव) |
हैं कुछ कहानियां ऐसी जो गांव को बंजर वीरां बताती हैं,,
मगर मेरी कविताओं में तो गांव का मौसम हसीन होता है।।
लिखीं हैं किसी ने गांव की उदासियां बेहिसाब अब तलक,,
पढ़ोगे जो कभी मुझको तो गांव की रौनक भी देखोगे।।
लगता है तुमने अब तक गांव रीते फीके ही देखे हैं,,
देखो इन शब्दों की तस्वीरों में गांव का श्रृंगार नजर आएगा।।
तुम्हारी कल्पना होगी गांव की किसी घृणित जगह के जैसे,,
अगर आओ कभी तुम गांव तो तुम्हें इस पर प्यार आएगा।।
बहुत ही खास होती है,नहीं ये आम होती है,,
बड़ी दिलचस्प मगर यार गांव की शाम होती है।।
अलौकिक शांति अनुपम सुकून बड़ा आराम होता है,,
झूमते वृक्षों की शाखाओं में हवा का जाम होता है।।
यहां के सौंदर्य में रंग रलियां हजार होती हैं
महीना कोई भी हो मौसम में बहार होती है
यहां की धरती को मेघ भी अपार दुलार देते हैं
जरा सी तपन महसूस हो तो बारिश की बौछार देते हैं।।
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| रोमांच से शराबोर पहाड़ी गांव की एक झलक (photo : Hardev Negi) |
कभी फूलों की बगिया से सज जाते हैं
कभी बर्फ की चादर से ढक जाते हैं
कभी सिकुड़ते है पूष की ठन्ड सिकुड़ते है
कभी जेठ की दोपहरों से तप जाते हैं
नहीं ये वीरान होते हैं ये तो रंगीन होते हैं
गांव तो हर मौसम में संगीन होते हैं।।
किसी शहर से क्यूं भला गांव के तुलना हो
गांव तो बस गांव होते हैं ,,गांव तो बस गांव होते हैं।
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शायद इस इक भूल से हम गांव से बिछड़ गए
कि शहरों के आगे गांव पिछड़ गए।।
बेशक रह लो जिंदगी भर उन शहरों में,,
मगर दिन दो चार ही मगर गांव आ जाना।।
नीलम रावत



बहुत सुंदर !!
ردحذفआभार
حذفशानदार लेखिका महोदया 😍😍
ردحذفधन्यवादम
حذفSunder
ردحذفधन्यवाद नेगी जी
حذفबहुत सुंदर
ردحذفआभार
حذفबहुत बहुत आभार आपका
ردحذفधन्यवाद
ردحذفAwesome lines
ردحذفBhut achaa bai ji
ردحذفबहुत सुंदर सृजन
ردحذفdhanyavad sameer
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